“सॉफ्टवेयर टेस्टिंग एक प्रैक्टिकल सब्जेक्ट (व्यावहारिक विषय) है” – श्री विपुल कोचर (इंडियन टेस्टिंग बोर्ड)…

Vipul Kocher_Linkedin

श्री विपुल कोचर, इंडियन टेस्टिंग बोर्ड (ITB) के प्रेसिडेंट हैं| 

इंडियन टेस्टिंग बोर्ड, इंटरनेश्नल सॉफ्टवेयर टेस्टिंग क्वालिफिकेशन्स बोर्ड  (International Software Testing Qualifications Board (ISTQB)) द्वारा स्वीकृत भारत का राष्ट्रीय बोर्ड है| इंडियन टेस्टिंग बोर्ड (ITB) की स्थापना वर्ष 2004 में की गयी थी और अभी तक ITB ने लगभग 80,000 सॉफ्टवेयर टेस्टर्स को ISTQB के सर्टिफिकेशंस में सर्टिफाई किया है|

सॉफ्टवेयर टेस्टिंग और भारत में इसकी मांग व भविष्य के बारे में हमने श्री विपुल से निम्न प्रश्नों के माध्यम से जानने का प्रयास किया|


 

1.   सॉफ्टवेयर टेस्टिंग और इससे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में बताएं?

सॉफ्टवेयर टेस्टिंग उस वक्त इस्तेमाल की जाती है जब कोई सॉफ्टवेयर बनाया जा रहा हो या बन गया हो| वस्तुस्थिति यह है कि कुछ भी बनाने के उपरांत हमारी चेष्टा यही रहती है की वह ठीक से बनी है या नहीं इसकी जांच कर ली जाय| इसी जांच को टेस्टिंग कहते हैं और जब यह सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट पर या सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट के लिए की जाती है तब इसे सॉफ्टवेयर टेस्टिंग कहते हैं| इसकी सबसे ख़ास बात यह है कि सॉफ्टवेयर टेस्टिंग करने के लिए आवश्यक स्किल, सॉफ्टवेयर डेवेलप करने की स्किल से काफी अलग होती है| जहां एक ओर सॉफ्टवेयर डेवेलपमेंट का फोकस किसी प्राडक्ट को काम करने हेतु बनाने या किसी प्राडक्ट से काम करवाने या किसी प्राडक्ट को ठीक करके काम करने योग्य बनाने पर होता है वहीं दूसरी ओर सॉफ्टवेयर टेस्टिंग यह जांच करने के लिए होती है कि वह प्राडक्ट जिस कार्य के लिए बनाया गया है वो वह कार्य कर पा रहा है या नहीं और यदि कर पा रहा है तो क्या ठीक से कर पा रहा है या नहीं|

सॉफ्टवेयर टेस्टिंग में एक सॉफ्टवेयर की सामान्य परिस्थितियों में तो जांच की ही जाती है, साथ ही यह भी जांच की जाती है कि असामान्य या विपरीत परिस्थितियों में, यूज़र गलत इनपुट दे दें, स्वयं सॉफ्टवेयर में कुछ समस्या आ जाए या यदि यह सॉफ्टवेयर, दूसरे सॉफ्टवेयर्स के साथ कार्य करता है तो इन सभी परिस्थितियों सॉफ्टवेयर ठीक से कार्य कर पा रहा है या नहीं और इनमें सॉफ्टवेयर का कार्य/व्यवहार ठीक रहता है या नहीं| उदाहरण के तौर पर एक ई-कॉमर्स वेबसाईट जिससे आप कुछ सामान ऑनलाइन खरीदना चाहते हैं, वह एक पेमेंट गेटवे पर जाती है लेकिन वह पेमेंट गेटवे उपलब्ध नहीं हो तब आप क्या करेंगे| तो क्या इस परिस्थिति में सॉफ्टवेयर यूज़र को ठीक-ठीक बता देता है कि अभी पेमेंट नहीं हो सकता है, इत्यादि| यह सब जांच करने का कार्य सॉफ्टवेयर टेस्टिंग का होता है|

इसके अलावा सॉफ्टवेयर टेस्टिंग यह जांच करने के लिए भी उपयोग में लाई जाती है कि सॉफ्टवेयर ठीक से परफ़ॉर्म कर रहा है या नहीं, या उसकी गुणवत्ता कैसी है| उदाहरण के तौर पर, IRCTC की वेबसाईट तत्काल बुकिंग के लिए ठीक से नहीं चलती है| तो सॉफ्टवेयर टेस्टिंग जांच कर यह बताएगा कि यह किन परिस्थितियों में ठीक से चलती है और किन में नहीं चलती, किन कारणों से नहीं चलती, सॉफ्टवेयर में कहाँ परिवर्तन की आवश्यकता है ताकी यह ठीक से कार्य कर सके| समस्या सॉफ्टवेयर की है या हार्डवेयर की| इन सब चीजों को जांचने में सॉफ्टवेयर टेस्टिंग मदद करती है|

2.   सॉफ्टवेयर टेस्टिंग को एक स्किल के रूप में आप कैसे परिभाषित करेंगे?

सॉफ्टवेयर टेस्टिंग एक ऐसी स्किल (कौशल) है जिसके लिए टेस्टर को बर्ड्स-आई-व्यू (Birds-Eye-View) या टेन-थाउजेंड-फीट-व्यू (10,000-thousand-feet-view) की निगाह रखनी होती है| इसका अर्थ यह हुआ कि टेस्टर को ना केवल सॉफ्टवेयर के डिटेल्स (विवरण) जानने होते हैं बल्कि सॉफ्टवेयर को काफी विस्तार से भी समझना होता है और साथ ही इससे जुड़े अन्य पहलुओं/मुद्दों को भी देखना/समझना होता है| जैसे, आमतौर पर किन परिस्थितियों में सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाएगा, कौन इसका उपयोग करेंगे, जो इसका उपयोग करेंगे वे सॉफ्टवेयर से क्या आशा/अपेक्षा रखते हैं, वे इसे किस तरह से उपयोग करेंगे क्योंकि उपयोग के बहुत से तरीके हो सकते हैं, आदि| ये गुण एक टेस्टर को बाज़ जैसी पैनी नज़र वाला और गहराई से सॉफ्टवेयर को समझाने वाला बनाते हैं जिससे उन्हें सॉफ्टवेयर की गलतियों का शीघ्र पता लगाने में सहायक होती हैं|

एक बेहतर टेस्टर बनाने के लिए सॉफ्टवेयर टेस्टर में ऐनलिटिकल थिंकिंग (विश्लेषणात्मक सोच) होना चाहिए| उन्हें बहुत सहनशील और संवेदनशील होना चाहिए क्योकि जब आप किसी की गलतियों का पता लगाते हैं और उसे इंगित करते हैं तो उन्हें बताने के लिए एक ऐसा मधुर तरीका चाहिए कि आप ये गलतियां समझा भी सकें और जिन्हें आप ये गलतियां बता रहें हैं उन्हें इसका बुरा भी ना लगे| इसलिए सॉफ्टवेयर डेवेलपर और सॉफ्टवेयर टेस्टर का सम्बन्ध बहुत मधुर होना चाहिए और इसके लिए सॉफ्टवेयर टेस्टर्स को काफी प्रयत्न करना पड़ता है|

इसके अतिरिक्त सॉफ्टवेयर टेस्टर को वर्तमान में उपलब्ध और भविष्य में आने वाली टेक्नोलॉजी का भी अच्छा ज्ञान होना चाहिए| जो सॉफ्टवेयर बनाया जा रहा है वह उस टेक्नोलॉजी के हिसाब से ठीक है यह समझ भी एक अच्छे सॉफ्टवेयर टेस्टर में होनी चाहिए|

3.   क्या सॉफ्टवेयर टेस्टिंग को एक व्यावहारिक (practical) स्किल के रूप में माना और सीखा जा सकता है?

इसका उत्तर नि:संदेह ही हाँ है| सॉफ्टवेयर टेस्टिंग एक थीअरेटिकल सब्जेक्ट (सैद्धांतिक विषय) नहीं है यह एक प्रैक्टिकल सब्जेक्ट (व्यावहारिक विषय) है| हाँ जब सॉफ्टवेयर टेस्टिंग को गहराई से, गहन रूप से और इस विषय को विस्तार से देखा, समझा जाता है तब इसे थीअरेटिकल सब्जेक्ट के रूप में पढ़ाया भी जा सकता है और पढ़ाया भी जाता है, लेकिन वस्तुस्थिति यह है कि सॉफ्टवेयर टेस्टिंग एक व्यावहारिक स्किल है| इसलिए जो भी टेस्टर्स हैं उन्हें यह जानना आवश्यक होता है कि सॉफ्टवेयर टेस्टिंग कैसे की जाती है|

सबसे मज़े की बात तो यह है कि हम सब लोग किसी ना किसी तरह टेस्टिंग से जुड़े हुए होते हैं| जब हम खाना खाते हैं और कहते हैं कि इसमें नमक कम है तब वह स्वाद भी है और टेस्टिंग (परिक्षण) भी| इसी तरह जब हम किसी सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं और कहते हैं कि इसमें यह गलत है, यह ठीक नहीं है या यह ऐसा होना चाहिए था तो वस्तुत: हम एक सॉफ्टवेयर टेस्टर का रोल निभा रहे हैं, उसी की भूमिका कर रहे हैं| इस स्किल को सिखाने के लिए साल्ट – स्कूल ऑफ़ एप्लाईड लर्निंग इन टेस्टिंग (SALT- School of Applied Learning in Testing) का एक कोर्स तैयार किया है जो व्यावहारिक रूप से इसे सिखाता है| इसमें थिअरी का उपयोग बहुत कम किया जाता है| प्रशिक्षुओं को सॉफ्टवेयर टेस्टिंग मुख्य रूप से हैंड्स-ऑन (hands-on) या व्यावहारिक तरीके से सिखाई जाती है|

4.   क्या यह ज्ञान केवल सॉफ्टवेयर टेस्टिंग तक ही सीमित है या अन्य क्षेत्रों में भी इस ज्ञान, अनुभव को उपयोग / अमल में लाया जा सकता है?

सॉफ्टवेयर टेस्टिंग एक व्यावहारिक स्किल है और इससे ऐनलिटिकल थिंकिंग (विश्लेषणात्मक सोच) भी विकसित और बेहतर होती है| यदि आप सॉफ्टवेयर टेस्टिंग को अच्छी तरह से समझ लेते हैं तो यह आपको कई क्षेत्रों में सहायक हो सकती है और इसे अमल में भी लाया जा सकता है| आप सॉफ्टवेयर डेवेलप कर सकते हैं, यदि आप बिजनेस ऐनलिस्ट (व्यापार विश्लेषक) हैं, जो कि डेवेलप किये जाने वाले सॉफ्टवेयर के उपयोगकर्ताओं (यूज़र्स) के पास जाकर उनकी आवश्यकताओं की पड़ताल करता है, वह यह कार्य और भी बेहतर तरीके से कर सकता है| अपने जीवन में भी यदि आप कुछ लेने, खरीदने जाते हैं या किसी स्थिति का आकलन करते हैं तो उन सब स्थितियों के आकलन में आपकी ऐनलिटिकल एबिलिटीज़ (विश्लेषणात्मक योग्यताएं) जो सॉफ्टवेयर टेस्टिंग से विकसित होती हैं वे सब आप अपने जीवन में व्यावहारिक रूप से उपयोग कर सकते हैं|

5.   क्या सॉफ्टवेयर टेस्टिंग, रोज़गार के बेहतर अवसर उत्पन्न करने और सॉफ्टवेयर व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण/आवश्यक स्किल है?

इंडियन टेस्टिंग बोर्ड लगभग 80,000 टेस्टर्स को सर्टिफाई कर चुका है| भारत में टेस्टर्स की संख्या के बारे में कोई प्रामाणिक तथ्य उपलब्ध नहीं हैं लेकिन ऐसा माना जाता है कि यहाँ लगभग 4,00,000 से अधिक टेस्टर्स हैं| पिछले छ: वर्षों में सॉफ्टवेयर टेस्टिंग व्यापार में काफी वृद्धि हुई है और इसके भविष्य में और भी बढ़ने की संभावना है| इस दृष्टी से देखें तो इसमें रोज़गार की विपुल संभावनाएं हैं|

6.   देश में सॉफ्टवेयर टेस्टिंग की वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा के बारे में कुछ प्रकाश डालें?

इस बारे में यही कहा जा सकता है कि सॉफ्टवेयर टेस्टिंग की वर्तमान स्थिति बहुत संतोषजनक है एवं भविष्य में इसके और भी बेहतर होने की उम्मीद है| इसका कारण यह है कि जैसे-जैसे सॉफ्टवेयर का प्रचलन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उसका उपयोग भी बढ़ रहा है| उसी हिसाब से सॉफ्टवेयर टेस्टिंग का स्कोप भी बढ़ता जा रहा है| पहले कुछ लोगों के पास ही डेस्कटॉप और लेपटॉप हुआ करते थे लेकिन वर्तमान में स्मार्टफोन को देखें तो भारत के आम नागरिकों के पास भी स्मार्टफोन हैं और स्मार्टफोन्स की संख्या डेस्कटॉप व लेपटॉप के बहुत अधिक है| यही स्थिति कमोबेश पूरी दुनिया में है| तो इसका अर्थ यह हुआ कि बहुत सारी एप्लीकेशंस इन स्मार्टफोन्स के लिए लिखी जा रही है अत: यह बहुत स्वाभाविक है कि सॉफ्टवेयर टेस्टिंग की मांग और आवश्यकता दिनों-दिन बढ़ेगी ही|

7.   सॉफ्टवेयर टेस्टिंग का उपयोग कॉर्पोरेट जगत के अतिरिक्त और किन क्षेत्रों में किया जा रहा है? इस बारे में इंडियन टेस्टिंग बोर्ड की जानकारी और मूल्यांकन क्या है?

सॉफ्टवेयर टेस्टिंग का कोर्पोरेट जगत के अलावा और किसी क्षेत्र में इस्तेमाल किये जाने की संभावना नहीं के बराबर है कोर्पोरेट जगत से हमारा मतलन उन सभी लोगों से है जो सॉफ्टवेयर का निर्माण करते हैं तो जहां सॉफ्टवेयर का निर्माण होता है वहीं सॉफ्टवेयर टेस्टिंग की ज़रूरत होती है और जो लोग इस सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं, वे लोग भी सॉफ्टवेयर टेस्टिंग का इस्तेमाल करते हैं| यदि वे यह सॉफ्टवेयर किसी से खरीदते हैं तो क्रय के पश्चात या क्रय से पहले वे यह जानना चाहते हैं कि यह सॉफ्टवेयर उनकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ती करेगा या नहीं, तो उसके लिए भी सॉफ्टवेयर टेस्टिंग का उपयोग किया जाता है|

8.   शासन और प्रशासन की परियोजनाओं में सॉफ्टवेयर टेस्टिंग / टेस्टिंग की उपयोगिता के प्रति अधिकारियों को जागरूक करने और परियोजनाओं में इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड द्वारा किये जा रहे प्रयासों और कार्यक्रमों के बारे में बताएं?

सॉफ्टवेयर टेस्टिंग के लिए भारत सरकार का अपना एक उपक्रम है STQC ( Standardisation Testing and Quality Certification (STQC) Directorate) और NIC (नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेण्टर) सॉफ्टवेयर डेवेलपमेंट के लिए भारत सरकार का एक उपक्रम है जो भारत सरकार के लिए सॉफ्टवेयर और उनकी वेबसाईट्स बनाया करते हैं| लेकिन सॉफ्टवेयर टेस्टिंग के प्रति इनका नज़रिया, इनका दृष्टिकोण या इनकी समझ उसके बारे में मैं ज़्यादा कुछ नहीं कहना चाहूंगा| अगर हम उनकी वेबसाईट का स्ट्रक्चर और डेवलपमेंट ही देख लें, उसके फीचर्स और उसे जिस तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है उसे ही देख लें तो उनके डेवेलपमेंट और सॉफ्टवेयर टेस्टिंग के बारे में अपने आप ही मालूम चल जाएगा|

जहां तक हमारे प्रयासों का प्रश्न है तो कुछ वर्ष पहले कुछ लोगों ने हमसे संपर्क किया था और हमने उन्हें बताने की चेष्टा की थी कि इंडियन टेस्टिंग बोर्ड क्या करता है, हमारे क्या सर्टिफ़िकेशंस हैं और किस तरह से सॉफ्टवेयर टेस्टिंग को बेहतर बना सकते हैं| लेकिन मुझे लगता है कि इस प्रश्न पर इंडियन टेस्टिंग बोर्ड (ITB) से ज़्यादा भारत सरकार, एकेडेमिया, या NASSCOM इनको इसमें कुछ करना होगा ताकि वो सरकारी उपक्रमों को सॉफ्टवेयर टेस्टिंग के बारे में कुछ बता सकें? शायद इनकी मजबूरी यह है कि इनको STQC से ही सब कुछ टेस्ट करवाना होता है| इस वजह से सॉफ्टवेयर टेस्टिंग की जो स्वतन्त्र कम्पनियां हैं क्या उनकी कोइ भूमिका हो सकती है या वे कुछ भूमिका निभा सकते हैं इस बारे मैं कुछ नहीं कह पाउँगा|

लेकिन आपने चूंकि यह सुझाव दिया है तो हम ज़रूर कोशिश करेंगे कि सरकार के पास जाएँ और उनसे कहें कि सॉफ्टवेयर टेस्टिंग की उपयोगिता और महत्त्व के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए कुछ योजनायें बनाएं|

9.   विभिन्न क्षेत्रों, छोटे उद्योगों और युवा उद्यमियों में सॉफ्टवेर टेस्टिंग / टेस्टिंग का प्रचार-प्रसार करने और उन्हें इसके उपयोग के लिए प्रेरित करते के लिए बोर्ड की क्या योजनायें हैं?

इसके बारे में मैं ज़रूर कह सकता हूँ, बता सकता हूँ कि बोर्ड की इसके बारे काफी योजनायें हैं| इंडियन टेस्टिंग बोर्ड ने हाल में ही स्टेप-इन फोरम नाम की एक नॉट-फॉर-प्रॉफिट फोरम को होस्ट करना शुरू किया है अर्थात इसके कार्यों की देखरेख अब इंडियन टेस्टिंग बोर्ड (ITB) करता है| इस कोंफ्रेंस में जो अभी बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद में आयोजित की जाती है, उसे जल्द ही हम चेन्नई और दिल्ली में भी आयोजित करेंगे| हम इसके लिए एक विशेष ट्रेक का निर्माण कर रहे हैं जिसमें युवा उद्यमियों और टेक्नोलॉजी उद्यमी को शामिल कर उन्हें सॉफ्टवेयर टेस्टिंग की उपयोगिता, उसकी महत्ता, उसके लाभ, इसे कैसे कम कीमत में किया जा सकता है, इसे उपयोग कर उनके द्वारा विकसित किये जाने वाले सॉफ्टवेयर की गुणवत्ता को और बेहतर किया जा सकता है, आदि ये सारी बाते उनसे करेंगे और उनकी क्या-क्या परेशानियां हैं उसके बारे में भी चर्चा करेंगे|

10. कॉलेज विद्यार्थियों के बीच सॉफ्टवेयर टेस्टिंग / टेस्टिंग को प्रचारित-प्रसारित करने और उन्हें ISTQB सर्टिफिकेशन के लिए प्रेरित / प्रशिक्षित करने के लिए आपके द्वारा किये जा रहे प्रयासों और चलाये जाने वाले कार्यक्रमों के बारे में बताएं?

SALT और इंडियन टेस्टिंग बोर्ड ने मिलकर एक कार्यक्रम बनाया है जिसमें हम मिलकर कॉलेज में जाते हैं और विद्यार्थियों को सॉफ्टवेयर टेस्टिंग के बारे में सिखाते हैं| इसके माध्यम से हम इंडस्ट्री और एकेडेमिया (शिक्षा और उद्योग) के बीच एक पुल बनाने का कार्य कर रहे हैं| उस कार्यक्रम के अंतर्गत उद्योगों की सॉफ्टवेयर टेस्टिंग की वे आवश्यकताएं जिनमें उनका पार्ट-टाइम (अंशकालिक) सॉफ्टवेयर टेस्टर्स से काम चल जाता हो, उन स्थितियों में हम विद्यार्थियों को सॉफ्टवेयर टेस्टिंग प्रोजेक्ट्स मुहैया करवाएंगे ताकि वे इसका प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस (व्यावहारिक अनुभव) प्राप्त कर सकें| साथ ही ऐसी कंपनियों को जिनके पास बजट कम है या जिनको बहुत सारे टेस्टर्स की ज़रूरत है, जिसे आजकल हम क्राउड-सोर्सिंग कहते हैं, उन्हें सॉफ्टवेयर टेस्टर्स उपलब्ध करवाएंगे| तो इस तरह हमारा प्रयास यह है कि कम कीमत में विद्यार्थियों और कोर्पोरेट जगत, दोनों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके| इसके लिए हमारे साथ कई कम्पनियां जुड़ रही हैं जैसे, स्काईटेस्टर्स, 99टेस्ट, आदि| ये क्राउड-सोर्सिंग प्लेटफोर्म हैं, जहां पर बहुत सारे टेस्टर्स आकर सॉफ्टवेयर प्राडक्ट को टेस्ट करते हैं|

इसके अतिरिक्त हम कॉलेजेज़ में सॉफ्टवेयर टेस्ट लैब स्थापित करते हैं| टेस्ट लैब स्थापित करने के लिए सबसे पहले हम यह देखते हैं कि उस कॉलेज के पास टेस्ट लैब स्थापित करने के लिए आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर, कंप्यूटर आदि हैं या नहीं और यदि वह कॉलेज अपने विद्यार्थियों को व्यावहारिक शिक्षा व कौशल (स्किल) प्रदान करने में उत्सुक होता है तो हम उनके साथ MOU साइन करते हैं| इसके बाद हम उन्हें एक प्रोग्राम देते हैं जिसमें दूसरे (2nd) सेमिस्टर के उपरांत हम विद्यार्थियों को सॉफ्टवेयर टेस्टिंग और उससे जुड़ी हुई कुछ प्रोफेशनल स्किल्स मुहैया करवाते हैं| इसके लिए हमारा प्रोग्राम कुछ इस तरह से होता है, कि हम कॉलेज मैनेजमेंट द्वारा चिन्हित प्राध्यापकों को ट्रेनिंग देते हैं और उसेक बाद हमारा सारा सॉफ्टवेयर जिसमें विडिओ, ई-लर्निंग, स्लाइड्स, एक्सरसाइज़ेज़ और ऑनलाइन प्लेटफोर्म होते हैं, ये सब उन्हें मुहैया करवाते हैं| इसके पीछे हमारा उद्देश्य यह है कि जो कॉलेज के प्राध्यापक हैं वे स्वयं ही विद्यार्थीयों को पढ़ा सकें| हम यह समझते हैं कि उन्हें इंडस्ट्री की बहुत अधिक जानकारी नहीं होती है, इसीलिए हम उन्हें विडिओ लेक्चर आदि सभी उपलब्ध करा देते हैं ताकि उन्हें कम परेशानी हो और शिक्षण में भी गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके| सभी असाइनमेंट्स जो विद्यार्थियों द्वारा किये जाते हैं हमारे प्रतिनिधियों द्वारा चेक किये जाते हैं| क्योंकि लगभग 80% कार्य विद्यार्थियों को स्वयं करना होता है इसलिए इस शिक्षण में याद रखने या रटने की आवश्यकता नहीं होती है और प्राध्यापकों की शिक्षण गुणवत्ता या उनके कम इंडस्ट्री अनुभव का उतना असर नहीं होता है|

3rd सेमिस्टर से 7th, 8th सेमिस्टर तक हर सेमिस्टर के लिए हमारे पास प्रोग्राम हैं, जिसमें हम कई तरह के सर्टिफिकेशंस करवाते हैं| इनमें ISTQB सर्टिफिकेशन, सर्टिफाइड मोबाईल एप्लीकेशन प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन है, जिसमें हम मोबाईल एप्लीकेशन को टेस्ट करना और उनको ऑटोमेट करना सिखाते हैं| इसके अलावा सर्टिफाइड वेब एप्लीकेशन प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन है, जिसमें हम वेब बेस्ड एप्लीकेशंस को टेस्ट करना, उनके परफोर्मेंस, सिक्युरिटी को टेस्ट करना आदि सिखाते हैं| तो इस तरह हमारे पास हर सेमिस्टर के लिए सर्टिफिकेशन वाले कोर्सेज़ हैं| विद्यार्थी चाहे तो कोई एक सर्टिफिकेशन करें या कई या सभी सर्टिफिकेशंस कर लें|

इसके साथ समर इंटर्नशिप का प्रोग्राम भी है| इस प्रोग्राम में जब विद्यार्थियों को करीब 6 हफ्ते (week) का प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस (व्यावहारिक अनुभव) लेना होता है, तब हम इन विद्यार्थियों को शामिल करते हैं| साथ ही इस प्रोग्राम में हमारी कई सहभागी कम्पनियां हैं जो हमें सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स देती है जो उन्हें टेस्ट करवाना होता है| इन विद्यार्थियों को हम सॉफ्टवेयर टेस्टिंग की बेसिक ट्रेनिंग देकर उनके द्वारा, सहभागी कंपनियों द्वारा दिए गये इन प्रोजेक्स की सॉफ्टवेयर टेस्टिंग करवाते हैं| तो इस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थियों में कॉलेज शिक्षा के दौरान ही वो स्किल्स आ जाती हैं, जो उन्हें जॉब में चाहिए होती हैं|

11. भारत के कार्यबल का एक बहुत बड़ा वर्ग जो काफी योग्य, सक्षम एवं सामर्थ्यवान है और नया ज्ञान एवं स्किल्स सीखना चाहता है लेकिन उनकी भाषा, अंग्रेजी ना होकर हिंदी या राज्य की भाषा या स्थानीय भाषा है| किन्तु सॉफ्टवेर टेस्टिंग / टेस्टिंग की समस्त विषय-वस्तु/ट्रेनिंग/परिक्षा आदि अंग्रेजी भाषा में ही उपलब्ध है| सॉफ्टवेर टेस्टिंग / टेस्टिंग के ज्ञान और इसकी विषय-वस्तु को गैर-अंग्रेजी भाषी कार्यबल के लिए सुलभ कराने के लिए क्या बोर्ड की कोई योजना है?

इसमें मैं दो बातें कहना चाहूँगा|

जब तक भारत का सॉफ्टवेयर व्यापार यूरोप और अमेरिका उन्मुख रहेगा या निर्यातोन्मुखी रहेगा| तब तक इस ज्ञान को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने से कुछ विशेष लाभ नहीं होने वाला है| इसका कारण यह है कि जो भी आवश्यकताएं लिखित में आती हैं वे सभी अंग्रेज़ी भाषा में ही आती हैं|

दूसरा, एक सॉफ्टवेयर टेस्टर के केवल टेस्ट ही नहीं करना होता है बल्की उसे समझना भी होता है कि ग्राहक क्या चाहता है, इस सॉफ्टवेयर का उपयोग करने वाला व्यक्ति क्या चाहता है| और यह समझने के लिए उन्हें जिस डोक्युमेंटेशन (दस्तावेजों) की ज़रूरत होती है वो सब अंग्रेज़ी भाषा में ही होते हैं| अत: यदि वे इसे नहीं समझेंगे तो वे टेस्ट भी नहीं कर पायेंगे| हाँ जब हमारे यहाँ का सॉफ्टवेयर हिंदी भाषा में और अन्य भारतीय भाषाओं में बनाने लगेगा तब यह विवशता ख़त्म हो जायेगी|

आप यह देखेंगे कि उच्च शिक्षा, अभियांत्रिकी (engineering) की शिक्षा, आदि अंग्रेज़ी भाषा में है, वह भारतीय भाषाओं में उपलब्ध नहीं है, जहां तक मुझे ज्ञान है| तो अगर वह ज्ञान वह टर्मिनालजी भारतीय भाषाओं में है ही नहीं तो अंग्रेज़ी की टर्मिनोलोजी तो हमें इस्तेमाल करनी ही पड़ेगी| और जब लोग डोक्युमेंट लिखते हैं, इन आवश्यकताओं को एकत्रित करते हैं कि यूज़र (उपयोगकर्ता) को क्या चाहिए, तो यह अंग्रेज़ी में लिखा जाता है| इसके अंग्रेज़ी में लिखा होने के कारण सॉफ्टवेयर टेस्टिंग का ज्ञान यदि आप प्रांतीय भाषाओं में उपलब्ध करवा देंगे तो उसका कोई विशेष उपयोग नहीं होने वाला|

जहां तक बोर्ड की योजना का प्रश्न है, हम यह उम्मीद करते हैं कि हम आपके साथ मिलकर इसे हिंदी भाषा में अनुवादित कर पायेंगे और हिंदी में अनुवाद करने के बाद अगर विभिन्न प्रांतीय भाषाओं में भी ऐसी आवश्यकता समझ में आती है तो हम उसके लिए भी प्रयत्न करेंगे|