एजाइल किड्स फीडबैक 1: एजाइल किड्स ने मुझे आत्मचिंतन का एक टूल प्रदान किया है……

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एक पिता द्वारा यह फीडबैक मेरे लिए एक बहुत सुखद आश्चर्य की बात थी, जिन्हें मैंने यह पुस्तक एक उपहार स्वरूप दी थी|

इस बारे में उन्ही के शब्दों में बयान करूं तो ज्यादा बेहतर होगा:

Hindiआपके उपहार का सम्मान करते हुए और पुस्तक के विषय के प्रति उत्सुकता व इसके हिंदी लैंग्वेज में होने के कारण मैंने इसे पढ़ना शुरू किया| शुरुआत में तो मुझे कुछ ज्यादा समझ में नहीं आई लेकिन धीरे-धीरे स्पष्ट होने लगी और इसके पारिवारिक आधार व उससे सम्बंधित उदाहरणों ने मुझे इस बुक को समझना आसान बना दिया| और इस बुक के 11वें चेप्टर में इस बुक की लेखिका शर्ली और उनकी माँ के बीच के एक संवाद को पढ़ने के बाद मैं स्वयं के बारे में इंट्रोस्पेक्शन (आत्म चिंतन) करने पर मजबूर हो गया| उनकी वह बातचीत थी:-

“मेरी माँ (लेखिका की माँ) ने मुझे कहा कि “अपनी टीचर से कहो कि होमवर्क स्वयं मेरी ज़िम्मेदारी है, इसलिए वे जैसा भी ठीक समझें उन्हें मुझे ही इसकी सज़ा देनी चाहिए”| मेरी माँ ने मेरी टास्क – मेरे होमवर्क की कोई ज़िम्मेदारी नहीं ली|”

इसे पढ़ने के बाद मेरे द्वारा किए इंट्रोस्पेक्शन (आत्म चिंतन) से मुझे अपनी कई गलतियों का एहसास हुआ| मैंने विचार किया कि यदि एक माँ का यह स्पष्ट व लॉजिकल (तर्क पूर्ण) रुख बच्चे में स्वयं के कार्यों के प्रति उत्तरदायित्व और जवाबदेही उत्पन्न कर सकता है तो उनमें अनुशासन लाना उतना मुश्किल कार्य भी नहीं है जितना माना या समझा जाता है और परिवार में तनाव का एक बहुत बड़ा कारण बनता है|

मेरी बड़ी लड़की स्कूल के दिनों में रात में समय से सोती नहीं थी, जिसके कारण वह सुबह स्कूल जाने के लिए समय से नहीं उठ पाती थी व उसकी स्कूल बस छूट जाती थी और अधिकतर मैं उसे कार में स्कूल छोड़ कर आता था या कई बार उसकी छुट्टी भी हो जाती थी| लेकिन यदि मैं अपने काम से शहर के बाहर गया होता था तो वह सुबह समय से उठकर अपने स्कूल चली जाती थी| क्योंकि घर के बाकी सदस्य थोड़े सख्त स्वभाव के हैं और उसे पता था कि पापा नहीं हैं तो उसे कोई स्कूल छोड़ने नहीं जाएगा व सभी स्कूल ना जाने पर नाराज़ भी होंगे|

Englishऐसा भी नहीं था कि मैं अपनी बच्ची को स्कूल छोड़ने जाते समय उसे रात में समय पर सोने और सुबह समय पर उठकर स्कूल बस में ही स्कूल जाने के लिए नहीं समझाता था| लेकिन जैसा स्पष्ट रुख इस बुक की लेखिका शर्ली की माँ ने रखा था मैंने कभी वैसा स्पष्ट रुख नहीं रखा और शायद इसी के कारण मैं अपनी बच्ची को इस बात को ठीक से समझा नहीं पाया कि सुबह समय पर उठकर स्कूल बस से ही स्कूल जाना स्वयं उसकी ही ज़िम्मेदारी है और साथ ही इसके कारण उत्पन्न होने वाले तनाव को भी नहीं समझ पाया और ना ही रोक पाया| हालांकि मेरी बच्ची बहुत समझदार है और वह अपनी रेस्पोंसिबिलिटी समझती है और शायद इसी लिए उसने अपने छोटे भाई में यह आदत नहीं आने दी| लेकिन यदि मैं शुरुआत से ही उसे स्वयं उसके कार्यों के प्रति उसका उत्तरदायित्व और जवाबदेही समझा पाता तो वह तभी से शायद अपने समय का बहुत बेहतर इस्तेमाल कर सकती थी|

मैं एक बड़े परिवार-खानदान का सदस्य हूँ| और इस बुक ने मुझे इंट्रोस्पेक्शन करने और चीजों को एक बेहतर पर्सपेक्टिव में समझने का एक प्रैक्टिकल टूल दिया है| अपने परिवार-खानदान के अन्य बच्चों से जुड़ने व उनका मार्गदर्शन करने में एजाइल किड्स बुक मेरी सहायता कर रही है और साथ ही मैं इसे स्वयं अपने काम-काज को व्यवस्थित करने में भी उपयोग कर रहा हूँ|


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